भाजपा के सबसे कद्दावर, दमदार और तड़ीपार चाणक्य कहे जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह इन दिनों भाजपा, संघ, सहयोगी दल, विपक्ष ॵर युवाओं के सवालों के बीच चक्रव्यूह में इस कदर फंसे हुए हैं कि ना कुछ उगलते बन रहा ना लीलते। पीड़ा घनेरी है।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भाजपा में इस्तीफा ना देने वाली परम्परा टूटने के बाद अब देश में सिर्फ़ अमित शाह त्यागपत्र दो का नारा बुलंद है। लेकिन बाहर गूंजते इस नारे से ज्यादा भाजपा और संघ के बीच भी अब बहुसंख्यक लोग गृहमंत्री के इस्तीफे के पक्षधर हैं। सरकार को समर्थन देने वाले चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के दल की भी यही राय है। ऐसा समझा जा रहा है कि नायडू और नीतीश के कुल 16 सांसद यदि सरकार का विरोध करते हैं तो सरकार गिर सकती है।
इसकी क्षतिपूर्ति के लिए तृणमूल से निकले 18 सांसद इसे बचा सकते हैं। जिसका आश्वासन नव गठित एनसीपीआई ने दिया है। यानि सरकार तब गिरने से बचाई जा सकती है। किंतु अंदरखाने से आ रही खबरें बता रही हैं कि ये सांसद इस समर्थन के बदले कम से कम चार मंत्री पद चाहते हैं। जो आसान नहीं है लेकिन सरकार बचानी है तो मुमकिन है मोदी जी इसे स्वीकार कर लें। जबकि ये 18 सांसद मोदी जी के करीबी भूपेंद्र यादव के निवास पर उनके आमंत्रण पर गए थे किन्तु जब भूपेंद्र यादव खुद अनुपस्थित रहे तब से इन सांसदों का मिज़ाज गर्म है।
लेकिन अब बात सिर्फ सरकार बचाने की नहीं है अमित शाह का इस्तीफा एक बड़ी उलझन लिए खड़ा है। विदित हो कि गृहमंत्री महोदय 31जुलाई से सदन में नहीं आ रहे हैं जिसे सारा देश देख रहा किंतु किरण रिजीजू हिम्मत से कह रहे हैं कि वे रोजाना संसद आते हैं और विभिन्न मसलों पर सदन समाप्त होने के बाद भी वहां रहकर विमर्श करते हैं। इस कुतर्क का लोग मज़ा ले रहे हैं। सदन लगभग ठप चल रहा है क्योंकि सांसदों को अपने सवाल के उत्तर गृहमंत्री से चाहिए हैं।
अब सवाल यह भी उठने लगा है कि संसद में बैठकर वे कर क्या रहे हैं अपने बचने का रास्ता ढूंढ रहे हैं या भागने से पूर्व अपनी फाइल दुरुस्त करने में लगे हैं।
एक बात तो तय है यदि गृहमंत्री इस्तीफा देते हैं तो सरकार बचानी मुश्किल होगी क्योंकि कूटनीतिक शतरंजी चाल ढाल और किसी के पास नहीं है। फिर मोटा भाई की जोड़ी टूट गई तो क्या बचेगा जी। एक तरफ नीतीश, नायडू अपना गेम खेल रहे हैं तो दूसरी ओर तृणमूल से छिटके लोग भी कहा जाता है एक षड्यंत्र के तहत ममता ने वहां भेजे हैं। वे अपने काम को अंजाम देकर तृणमूल में आ जाएंगे।
अब ये तो समय बताएगा कि आने वाले कल में वर्तमान गृहमंत्री के त्यागपत्र के बाद सरकार की क्या हालत बनती है। राजनीति के जानकारों का ख़याल है कि गृहमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट भी शिकंजा कसने वाला है। यानि कि अमित शाह जी चारों ओर से जिस चक्रव्यूह में फंसे हैं उससे उन्हें निज़ात मिलने के कोई चांस नहीं।संघ भी अब इन्हें और बर्दाश्त नहीं करेगा। ये मोहन भागवत के मुंबई में जेन अल्फा बच्चों को दिए भाषण से स्पष्ट है वे जंतर-मंतर आंदोलन में जेन जेड को कतई दोषी नहीं मान रहे हैं। यानि दोषी भारत सरकार और उसके प्रधानमंत्री व गृहमंत्री ही हैं।
बहरहाल चाणक्य की संसद में हो रही बैठकें रहस्यपूर्ण हैं। वे क्या गुल खिलाती हैं यह चिंतनीय हैं।
(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)